Monday, November 29, 2010

26/11 बदलते समय और परिस्थित की पृष्ठभूमि में-अज़ीज़ बर्नी

26 नवम्बर 2008 को मुंबई पर होने वाले आतंकवादी हमले पर कल जब मैं अपना लेख लिख रहा था तो अंत तक पहुंचते-पहुंचते इतनी जगह नहीं रह गई कि मैं श्री एस एम मुशरिफ की किताब के हवाले से और अजमेर बम धमाकों की नज़ीर पेश करके जो कहना चाहता था, उसे पूरा कर पाता। लिहाज़ा आप से अपील करना ज़रूरी लगा कि कल का लेख ज़रूर पढ़ें।
असल में जिस खास बात पर मैं ध्यान आकर्षित कराना चाहता था वह यह कि हर बम धमाके के बाद संघ परिवार और भारतीय जनता पार्टी का जितनी तेज प्रतिक्रिया होती थी आखिर 26 नवम्बर 2008 को होने वाले इतने बड़े बम धमाका के बाद इतनी तीव्र प्रतिक्रिया क्यों नहीं हुइ? क्या उनका यह कार्यशैली कुछ सोचने पर मजबूर नहीं करती? अजमेर बम धमाकों का हवाला देने का भी उद्देश्य यही था कि पुलिस के द्वारा से पहले जो कहानी पहले पेश की गई, वह गलत साबित हुई और पहले जिन आरोपियों को पहले अजमेर बम धमाकों में संलिप्त पाया गया था बाद में इनके अलावा कुछ और नाम सामने आये नये सिरे से की जाने वाले जांच ने जिन नामों को सामने रखा उसने पूरे परिदृश्य को बदल दिया। पहले संदेह जिस ओर जा रहे थे और बाद में जो परिणाम सामने आये उनमें बड़ा बदलाव था, इसी तरह मालेगांव बम धमाके की जांच को सामने रखा जाये तो घटना के तुरंत बाद जिन आरोपियों के नामों को सामने रखा गया था बाद की जांच ने जो आश्चर्यजनक रहस्योद्घाटन किये वह देश के आतंकवाद के इतिहास में एक नया अध्याय था और यह कहना गलत नहीं होगा कि मालेगांव बम धमाकों की जांच से शहीद हेमन्त करकरे ने आतंकवाद का जो चेहरा सामने रखा उनसे पहले उस पर किसी का ध्यान नहीं गया था। या कोई उस चेहरे को सामने रखने की हिम्मत नहीं जुटा सका था और यह भी हो सकता है कि तस्वीर के इस रूख को जान बुझ कर सामने आने ही न दिया गया हो, जो भी हो उन नामों के सामने आने के बाद से ही देशव्यापी स्तर पर जो हंगामा शुरू हुआ वह न जाने कब तक जारी रहता अगर इस बीच 26 नवम्बर 2008 को मुंबई पर आतंकवादी हमला न हुआ होता। अतएव अगली कुछ पंक्तियां लिखने से पहले मैं अपने पाठकों और भारतीय सरकार का ध्यान अक्तूबर-नवम्बर 2008 की परिस्थतियों की ओर आकर्षित कराना चाहूंगा। उन परिस्थितियों को समझने के लिए उस समय के परिदृश्य की एक झलक पेश कर रहा हूं, इतिहास के पन्नों पर दर्ज इन कुछ पंक्तियों के माध्यम से आसानी से समझा जा सकेगा कि किन किन विषयों पर उस समय देशव्यापी स्तर पर चर्चा हो रही थी और अगर यह आतंकवादी हमला न हुआ होता तो यह चर्चा किस अंजाम तक पहुंचती।
31 दिन पहलेः 26 अक्तूबर की खबर के अनुसार एटीएस की टीम जांच के लिए भोपाल गई और दो पूर्व सैन्य अधिकारियों से पूछताछ की गई।
इसी तारीख को भारतीय जन शक्ति पार्टी की अध्यक्ष उमा भारती ने कहा कि प्रज्ञा किसी भी हिंसात्मक घटना में संलिप्त नहीं हो सकती क्योंकि वह साध्वी है और साध्वी सिर्फ पूजा पाठ और शांति की बात करती है।
30 दिन पहलेः 27 अक्तूबर को जबलपुर में साध्वी के घर की तलाशी ली गई और एटीएस ने संवेदनशील सबूत जमा किये।
28 दिन पहलेः 29 अक्तूबर को प्रज्ञा के भाई ने मानवाधिकार आयोग और मुंबई हाईकोर्ट में एक स्वायत जांच आयोग की मांग की और उसके साथ दूसरे हिन्दू संगठनें भी खड़े नज़र आये।
27 दिन पहलेः 30 अक्तूबर भाजपा हिन्दू संगठनों के नाम आने पर बोखला गई और खुलेआम आरोपियों की रक्षा में खड़ी हो गई। भाजपा के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘‘ मीडिया इस पूरे मामले को आरूषी हत्या केस की तरह पेश कर रही है’’ और प्रज्ञा के पक्ष में कहा कि जो लोग सांस्कृति राष्ट्रवाद पर विश्वास रखते हैं वह आतंकवाद में संलिप्त हो ही नहीं सकते। उन्होंने एटीएस के नारको टेस्ट पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया और कहा कि किसी खतरनाक आतंकवादी को भी इस तरह टार्चर नहीं किया जाता लेकिन एटीएस के मुखिया हेमन्त करकरे ने सारे आरोपियों पर मकोका लगा दिया। इसी बीच हिन्दू महासभा ने कर्नल पुरोहित और दूसरे आरोपियों को कानूनी मदद देने की घोषणा की।
25 दिन पहलेः 1 नवम्बर को साध्वी के ब्रेन मेपिंग टेस्ट में एटीएस साध्वी से कुछ भी उगलवाने में असफल रही। यह टेस्ट नागपरा पुलिस अस्पताल में उसी सप्ताह किया गया और फिर पुलिस ने दूसरे फारेंसिक टेस्ट की तैयारी शुरू कर दी।
उसी दिन खबर आई कि समीर कुलकर्णी को एटीएस ने मालेगांव धमाके के आरोपी के तौर पर पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। समीर कुलकर्णी भोपाल के एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करता था। पुलिस के अनुसार 37 वर्षीय कुलकर्णी अभिनव भारत का संस्थापक सदस्य था।
24 दिन पहलेः 2 नवम्बर के अनुसार भोंसला मिलेट्री स्कूल के प्रधानाचार्य को गिरफ्तार करके उससे पूछताछ की गई उसी तारीख को बाल ठाकरे ने भाजपा की इस बात की भत्र्सना की कि वह साध्वी का रक्षा नहीं कर रही है और उससे हिन्दू समाज के हृदय को आघात पहुंच रहा है। भाजपा और शिवसेना ने विभिन्न स्थानों से बेहतरीन वकीलों को जमा करके नासिक कोर्ट के सामने धरना दिया।
22 दिन पहलेः 4 नवम्बर एटीएस के अनुसार आरोपी प्रज्ञा सिंह ने स्वीकार किया कि उसीे ने अपनी मोटर साईकिल संदिग्ध रामजी जिसने बम रखा था, को दी थी लेकिन साथ ही उसने यह भी बताया कि उसे इसके प्रयोग के बारे में पता नहीं था कि रामजी का उस मोटर साईकिल को लेकर क्या पदजमदजपवद था यह (थ्तममकवउ) डस्माॅडल की बाईक थी।
उसी दिन साध्वी के पक्ष में अपने बयान से पलटते हुए भाजपा ने उसे कानूनी सहायता देने का फैसला किया इससे पहले भाजपा ने साध्वी के बारे में कड़ा रूख अपनाये हुई थी। उसी तारीख को जांच एजेंसी एटीएस ने मालेगांव धमाका के 8 आरोपियों पर मकोका लगाने का फैसला किया।
21 दिन पहलेः 5 नवम्बर मुंबई एटीएस ने आरोपी लेफ्टिनेंट पुरोहित को गिरफ्तार करके जांच करने की तैयारी शुरू कर दी और उसी तारीख को साध्वी पर भी मकोका लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई।
20 दिन पहलेः 6 नवम्बर को कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस को उसके मोबाईल से दूसरे संदिग्ध आरोपियों को किये गये कई एसएमएस मिले यह एसएमएस कोडवर्ड में किये गये थे जिनमें ब्ंज पे वनज व िजीम इंेबामज दूसरा ैपदही ींे ेनदहीए इसके अलावा ूम ंतम वद जीम तमकंत व ि।ज्ैए बींदहम जीम ेपउ बंतकयह वह एसएमएस था जो कर्नल पुरोहित के मोबाईल से रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय को भेजा गया था। इससे पहले पुलिस उपाध्याय को इस मामले में गिरफ्तार कर चुकी थी और उसको 15 नवम्बर तक पुलिस रिमांड पर ले लिया गया था।
19 दिन पहलेः 7 नवम्बर, को एटीएस के अनुसार कर्नल पुरोहित ने स्वीकार किया कि वह मालेगांव धमाके का सरगना था। उसके साथ साथ उन्होंने यह भी कुबूल किया कि उन्होंने धमाके का षड्यंत्र तैयार किया था और 29 सितम्बर के लिए विस्फोटक सामग्री सेना से उपलब्ध कराया था और हथियार भी उपलब्ध कराये थे, यह सारी चीजें अभिनव भारत के सदस्यों के हवाले की थीं।
उसी तारीख को आर्मी डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल ने बयान दिया कि कर्नल पुरोहित की गिफ्तारी सेना का मोराल गिरा है। उसी तारीख को तोगड़िया ने अभिनव भारत की निन्दा की।
18 दिन पहलेः 8 नवम्बर कर्नल पुरोहित से संबंधित मुंबई एटीएस ने दो और सैन्य अधिकारियों से पूछताछ की साथ ही एटीएस ने यह भी बताया कि कर्नल पुरोहित पर मकोका लगया जा सकता है। उसी तारीख को सबूत के सामने आने के बाद संघ परिवार ने कर्नल पुरोहित और दूसरे गिरफ्तार आरोपियों से किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया जबकि उससे पहले धमाका करने वाले आरोपियों का खुलकर समर्थन कर रहा था।
उसी तारीख को कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया कि भाजपा सेना का भगवाकरण कर रही है। यह बयान अभिषेक मनु सिंघवी ने दिया।
17 दिन पहलेः 9 नवम्बर को एटीएस का बयान आया कि एटीएस तीन वीएचपी लीडर, जो गुजरात से संबंध रखते हैं उनके बारे में जांच करना चाहती है क्योंकि उन तीनों का संबंध समीर कुलकर्णी से है जो अभिनव भारत का संस्थापक सदस्य है।
16 दिन पहलेः 10 नवम्बर को एटीएस ने एक और सनसनीखेज पर्दाफाश करते हुए कहा कि कर्नल पुरोहित का हाथ परभनी, जालना और नांदेड़ धमाका में है। एटीएस के सामने यह बात कर्नल पुरोहित के नारको टेस्ट के दौरान आई।
15दिन पहलेः 11 नवम्बर को गोरखपुर के एमपी योगी आदित्यानाथ ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह हिन्दू संगठनों के सदस्यों को झूठे मुकदमे में फंसा रही है।
14 दिन पहलेः 12 नवम्बर को केंद्र ने सभी राज्य सरकरों से बजरंग दल से संबंधित एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी। केंद्र का मानना था कि बजरंग दल के कार्यकर्ता विभिन्न साम्प्रदायिक दंगों में संलिप्त हो सकते हैं।
13 दिन पहलेः 13 नवम्बर हरियाणा पुलिस ने मालेगांव धमाके के तार समझौता एक्सप्रेस बम धमाके से जुड़े होने की बात कही और संबंधित पुलिस अधिकारियों को पुछताछ के लिए मुंबई भेजा।
14 नवम्बरः एटीएस ने नासिक कोर्ट में रहस्योद्घाटन किया कि महंत दयानन्द पांडे ने पुरोहित को आरडीएक्स सप्लाई करने का आदेश दिया था।
12 दिन पहलेः दयानंद पांडे कानापुर धमाके में भी संदिग्धः एटीएस
11 दिन पहलेः 15 नवम्बर राजनाथ सिंह ने इस पूरे मामले को ‘एक बड़ा षड्यंत्र बताया’, उन्होंने कहा ‘ मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूं कि साध्वी आदि इस षड्यंत्र में संलिप्त नहीं हैं’
पुरोहित ने समझौता एक्सप्रेस धमाके के लिए आरडीएक्स सप्लाई कियाः एटीएस
नासिक कोर्ट में पुरोहित ने एटीएस के माध्यम से किसी भी तरह से प्रताड़ित किये जाने के आरोप को खारिज कर दिया।
लालू ने आडवाणी को ‘ज्मततवत डंेा’ कहा।
9 दिन पहलेः 17 नवम्बर मालेगांव धमाके के तार अजमेर शरीफ और मक्का मस्जिद बम धमाके से जुड़े हैं ः एटीएस
8 दिन पहलेः 18 नवम्बर, आडवाणी और राजनाथ सिंह ने एटीएस पर आरोप लगाया कि एटीएस और कांग्रेस में सांठगांठ है और वह ‘न्दचतवमि पेवदंस’जांच कर रही है।
6 दिन पहलेः 20 नवम्बर, एटीएस ने मालेगांव बम धमाके के आरोपियों पर मकोका लगया।
साध्वी प्रज्ञा की मोटर साईकिल खरीदने वाला व्यक्ति 2007 में मारा गयाः एटीएस
5 दिन पहलेः 21 नवम्बर, मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगया कि वह ‘टवजम ठंदा चवसजपबे’ कर रही है।
‘पाकिस्तान जो काम 20वर्षों में नहीं कर सका वह भारतीय सरकार (ब्वदहतमे) ने 20 दिन में कर दिखाया’ मोदी
2 दिन पहलेः 24नवम्बर, पुरोहित ने सीबीआई को बयान दिया ‘वीएचपी लीडर अभिनव भारत के स्थापना में सबसे आगे थे उन्होंने कहा कि आरएसएस लीडर इंद्रेश कुमार ने पाकिस्तान की आईएसआई से 3करोड़ रूपये लिये। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने मालेगांव धमाका के लिए पुरोहित को उसका ब्तमकपज लेने से इनकार किया और कहा ‘उनके लोगों’ ने यह धमाका किया है न कि अभिनव भारत ने’।
उस दिन अर्थात दो दिन पहले ही पुलिस कंट्रोल रूम में शाम 5.20 पर करकरे को कत्ल करने का धमकी भरा फोन आया था जिसका खुलासा संयुक्त आयुक्त पुलिस राजेन्द्र सोना विनय अपने बयान में किया था। यह फोन काल सहकार नगर के एक पीसीओ, जिसका नम्बर 24231375 से आया था।
उसी दिन दयानन्द पांडे ने स्वीकार किया कि उसने आरडीएक्स उपलब्ध कराया था।
उसी दिन मकोका अदालत ने साध्वी प्रज्ञा सिंह, कर्नल पुरोहित और दयानन्द पांडे का एटीएस की ओर से रिमांड की मुद्दत बढ़ाने की मांग को खारिज कर दिया था क्योंकि उन तीनों ने एटीएस पर प्रताड़ित करने का अरोप लगाया था।
एक दिन पहलेः 25 नवम्बर, मकोका अदालत ने एटीएस को प्रताड़ित के आरोपों पर जवाब मांगा।
महाराष्ट्र के एटीएस से मानवाधिकार आयोग ने प्रताड़ित के आरोपों पर सफाई पेश करने को कहा।
कर्नल पुरोहित ने स्वीकार किया कि उसने इस साल आरएसएस प्रमुख सुदर्शन से जबलपुर में भेंट की और आरएसएस लीडर इंद्रेश कुमार के भूमिका की शिकायत की।

.............................................................(जारी)

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