Tuesday, February 22, 2011

इस मुल्क का मुसलमान गद्दार नहीं


बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से मुंबई हमलों के दोषी अजमल क़साब की मौत की सज़ा बरक़रार रखने और भारतीय नागरिकों फ़हीम अंसारी और सबाउद्दीन को बरी किए जाने पर संबंधित लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं रही हैं.
कसाब की वकील फ़रहाना शाह ने इस मामले में कहा, ''कसाब को जो सज़ा दी गई है, हम उसे तहे दिल से हम मानते हैं. हम कसाब को सलाह देंगे कि वो उच्चतम न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं. हमें बहुत उम्मीद थी कि अदालत हमारी बातों को ध्यान में रखेगी. जैसे हमने दोबारा ट्रायल की बात की थी. कसाब का कहना था कि उन्हें जाली मुठभेड़ दिखाकर पकड़ा गया था. मेरी शनिवार को क़साब से मुलाकात हुई थी और हमने उन्हें आज के बारे में बताया था. वो काफ़ी कमज़ोर, परेशान और विचलित दिख रहे थे.''

मौत की सज़ा

फ़हीम औऱ सबाउद्दीन गुनेहगार नहीं हैं. इस मुल्क का मुसलमान गद्दार नहीं वफ़ादार है. हमें खुशी है कि इंसाफ़ की जीत हुई है. एटीएस जिस तरह बेगुनाह मुसलमानों को जेल में बंद करती थी, उसका पर्दाफ़ाश हुआ है- जमीयत उलमाए हिंद महाराष्ट्र के सचिव
महाराष्ट्र के बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को क़साब की मौत की सज़ा की पुष्टि कर दी है. इससे पहले निचली अदालत ने भी क़साब को यह सज़ा सुनाई थी.
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि क़साब और अबू इस्माइल ने जिस बर्बरता से निर्दोष लोगों की जानें लीं वह 'रेयरेस्ट ऑफ़ दी रेयर' की श्रेणी में आता है और उसमें दया की कोई गुंजाइश नहीं है. क़साब को सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार है.
हाईकोर्ट ने फ़हीम अंसारी और सबा हुसैन शेख़ को बरी करने के निचली अदालत के फ़ैसले को सही ठहराते हुए उसे बरक़रार रखा है.
इस फ़ैसले पर खुशी ज़ाहिर करते हुए जमीयत उलमाए हिंद महाराष्ट्र के सचिव गुलज़ार आज़मी ने कहा, ''हमें खुशी है कि एक बेगुनाह की बेगुनाही साबित हुई. फ़हीम और सबाउद्दीन गुनेहगार नहीं हैं. इस मुल्क का मुसलमान गद्दार नहीं वफ़ादार है. हमें खुशी है कि इंसाफ़ की जीत हुई है. एटीएस जिस तरह बेगुनाह मुसलमानों को जेल में बंद करती थी, उसका पर्दाफ़ाश हुआ है. इसी तरह मालेगाँव मामले में भी हमें उम्मीद है कि जेल में बंद बेगुनाह मुसलमानों को ज़मानत मिल जाएगी.''

दोबारा अपील


न्यायालय परिसर में मौजूद कसाब की वकील फ़रहाना शाह.
फ़हीम अंसारी की पत्नी यास्मीन ने कहा, ''जितनी भी हमारे घरवालों ने तकलीफ़ें उठाई हैं, वो आज इस फ़ैसले से ख़त्म हो गई. ''
फ़हीम के वकील आरबी मोकाशी का कहना है, ''सरकार साबित नहीं कर पाई कि फ़हीम का इस मामले में कोई हाथ नहीं था. ये साबित नहीं हुआ कि फ़हीम अंसारी नेपाल गया, ये भी साबित नहीं हुआ कि फ़हीम अंसारी ने नक्शे बनाए थे और उसकी मदद से हमलावर मुंबई में गए. ये भी साबित नहीं हुआ कि एक चरमपंथी से जो नक्शा मिला, उसमें फ़हीम का हाथ था. इल्ज़ाम लगाना और इल्ज़ाम साबित करना ये दो अलग अलग बात है.''
इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा की सरकार इस मामले में फ़हीम और सबाउद्दीन को बरी किए जाने के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी.

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