Wednesday, March 09, 2011

भ्रष्टाचारियों के बीच बाबा रामदेव


अभी कांग्रेस की दुश्मन भाजपा को दोस्त मानकर, किसी भ्रष्टाचारमुक्त समाज की कल्पना की जा रही है तो ज़रा एक बार जय प्रकाश नारायण  के प्रयोग को भी याद कर लें,जिसमें उन्होंने इंदिरा गांधी को सत्ता से हटाने को ही क्रांति मान लिया था...
हिमांशु कुमार

'हेलो! हिमांशु जी बोल रहे हैं?' मेरे हाँ कहने पर उधर से आवाज़ आयी, 'हम भारत स्वाभिमान मंच से बोल रहे हैं.हमने आपकी स्पीच तहेलका की साईट पर देखी है,बाबाजी चाहते हैं आप भारत स्वाभिमान मंच से जुड़ें.' 

मैं उन दिनों साईकिल यात्रा पर था और उस दिन राजस्थान के झूंझनू में था. मैंने कहा 'बाबा रामदेव जी छत्तीसगढ़ आते हैं, पर रायपुर से ही मुख्यमंत्री से पैर छुआ कर वापिस चले जाते हैं, अगर बाबा दंतेवाडा आकर आदिवासियों से मिलते हैं तो हम मानेंगे की बाबा को देश के कमज़ोर लोगों की परवाह है.इसके बाद ही बात कुछ आगे बढ़ेगी.'
अब उठाएंगे देश का भार  
इसके बाद इस तरह के फोन दो बार और आये.बातचीत में मैंने अपनी मन की शंकाएं बताई और मुझे आग्रह्कर्ता कभी भी संतुष्ट नहीं कर पाए.इसके बाद ऐसे फोन आने बंद हो गए. मुझे अभी बाबा रामदेव के साथ इस देश के बड़े-बड़े क्रांतदर्शी लोगों के चले जाने पर बड़ी बेचैनी हो रही है,क्योंकि  बाबा जिस परिवर्तन की और नई समाज रचना की बातें कर रहे हैं, उसकी एक भी ईंट उनके पास नहीं है.

पहला खतरा तो यह है कि बाबा के चारों तरफ भाजपा के लोगों का जमावड़ा है. भाजपा भ्रष्टाचार के मामले में कहीं से भी कांग्रेस से कमतर है,देश में ऐसा कोई भी नहीं मानता.यहाँ तक कि सार्वजनिक रूप से ऐसा कहने की हिम्मत तो बाबा भी नहीं कर सकते.

राजनीति में दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है.इस नाते अगर अभी कांग्रेस की दुश्मन भाजपा को दोस्त मानकर किसी भ्रष्टाचारमुक्त समाज बनाने की कल्पना की जा रही है तो ज़रा एक बार जेपी के प्रयोग को भी याद कर लें, जिसमें उन्होंने इंदिरा गांधी को सत्ता से हटाने को ही क्रांति मान लिया
था और आरएसएस को साथ लेकर एक वैकल्पिक राजनीति की कल्पना कर डाली थी.

सारे देश ने देखा की मात्र सरकार बदलने से कुछ भी नहीं बदला.कांग्रेस फिर सत्ता में आ गयी और जेपी के नज़दीकी लोग जानते हैं अंतिम समय में जेपी कितने निराश थे. खैर,बाबा तो राजनीतिक रूप से जेपी जितने परिपक्व भी नहीं हैं,परन्तु वे अपनी बातचीत से ऐसा खाखा खीँच रहे हैं जैसे उनके पास इस देश के भ्रष्टाचार को समाप्त करने का कोई नुस्खा आ गया है.जबकि सच्चाई कुछ और है.
भाजपा के तीन मुख्यमंत्री: कौन है बेदाग

बाबा स्विस बैंकों के पैसे को वापिस देश में लाने पर सबसे ज्यादा जोर दे रहे हैं परन्तु काले धन की खान पर बैठे हुए अरबों रुपया बना रहे भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ बाबा की गलबहियां हैं.

 भ्रष्टाचार का सबसे घृणित रूप कर्नाटक के भाजपा राज में मंत्री बने हुए बेल्लारी बंधू की खुलेआम लूटपाट और दादागिरी,गुजरात में आदिवासियों की ज़मीने कॉर्पोरेट को देना और वन भूमि अधिनियम का पालन न करना और उस पर सर्वोच्च न्यायालय की फटकार,छत्तीसगढ़ में पैसा खाकर हजारों आदिवासियों की हत्या और उनका विस्थापन बाबा की नज़र में भ्रष्टाचार है ही नहीं.

अगर बाबा और इनके पीछे खड़े देश के समझदार लोग सचमुच ऐसा मान रहे हैं कि   पूंजीपतियों का   ये भ्रष्ट व्यवसाय ऐसे ही चलता रहे,शहरी मध्यम वर्ग के आर्थिक हितों के लिए ग्रामीण भारत का खून चूसना भी चलता रहे और कुछ वर्त्तमान नेताओं को बदल देने से क्रांति हो जायेगी, तो भाई ऐसा तो  फिल्मों में होता है सचमुच की ज़िंदगी में नहीं.


दंतेवाडा स्थित वनवासी चेतना आश्रम के प्रमुख और सामाजिक कार्यकर्त्ता हिमांशु कुमार का संघर्ष,बदलाव और सुधार की गुंजाईश चाहने वालों के लिए एक मिसाल है.उनसे vcadantewada@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है.

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