Monday, March 07, 2011

ऑफिस की सेक्युलर छवि पर आघात


news24 secular image crash
न्यूज़24 की सेक्युलर छवि पर सवालिया निशान
न्यूज़24 के कार्यालय परिसर में ‘सुंदरकांड’ का पाठ हुआ. क्या यह कोई बड़ा मुद्दा है? एक नज़र में देखें तो शायद कोई मुद्दा दिखाई न देता हो.
एक सामान्य दर्शक विवेक वाजपेयी बातचीत में इस मुद्दे पर हमारे रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहते हैं – “ अरे भइया क्या चैनल वाले भगवान की पूजा नहीं कर सकते...पूजा पाठ से चैनल की मानसिकता का क्या ताल्लुक है भाई....पूजा-पाठ या अपने आराध्य का ध्यान करना हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है.”


लेकिन दूसरी तरफ उसी चैनल के एक पत्रकार ( जो हिंदू धर्म से ही ताल्लुक रखते हैं) संजय सिंह ( बदला हुआ नाम) कहते हैं – “पुष्कर जी आपने बहुत सही मुद्दा उठाया है. लेकिन लोग सच्ची बात सुनकर चिड़चिड़ा रहे हैं, ऑफिस की छवि सेक्युलर होनी चाहिए. लेकिन यहां एंट्री पर ही आपको गणेश की मूर्ति नजर आएगी. इसके अलावा समय - समय पर इस तरह का पूजा पाठ होता ही रहता है. हमलोग खुद इस बात को लेकर परेशान रहते हैं. पूजा के बाद खुद चैनल की चेयरपर्सन अनुराधा प्रसाद , प्रसाद लेने के लिए सबको बुलावा भेजती हैं. कई बार सोंचता हूँ कि यह कैसा चैनल है जहाँ पर सीईओ सुन्दरकांड के लिए मेल लिखता है और चेयरपर्सन सुन्दरकांड का प्रसाद खाने के लिए बुलावा भेजती है. धार्मिक आस्था रखने के बावजूद, कई बार कोफ़्त होती है. उफ़ ......... चु............की हाईट है. पूजा – पाठ में आपकी आस्था है तो अपने घर पर पूरी श्रद्धा और आस्था से कीजिये ना. ऑफिस में ऐसे आडम्बर की क्या जरूरत?”

एक
 दूसरे दर्शक अजय घई इस मुद्दे पर कहते है – “यह धार्मिकता का ढोल है ? परमात्मा के नाम पर मीडिया से लोगो को जोड़ना भी बाजार का ही एक रास्ता है . लोग अपने नजरिये से कहने के लिए अपने विचार रखते है .अगर कोई सच्ची खबर पाठको को मिलती तो मीडिया की गतिविधि की ज्यादा तारीफ होती .”

ऊपर
 की दो प्रतिक्रियाओं में दो बड़े महत्वपूर्ण शब्द हैं – व्यक्ति और सेक्युलर. न्यूज़24 के मालिक – मालकिन पूजा – पाठ करना चाहते हैं. इसपर भला किसी को क्या आपत्ति हो सकती है ? यह उनकी आस्था है और उसको वे पूरा कर सकते हैं. लेकिन दिक्कत तब हो जाती है जब आस्था का सार्वजनिक प्रदर्शन होने लगता है और इस क्रम में उसे दूसरे पर थोपा जाने लगता है. न्यूज़24 में कुछ ऐसा ही हो रहा है. सुन्दरकाण्ड और ऐसे ही और पूजा अनुष्ठान कर सीधे – सीधे ऑफिस की सेक्युलर छवि को नुकसान पहुँचाया जा रहा है.

सुंदरकांड
 पर कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन इस तरह ढोल पीटकर चैनल के दफ्तर में ऐसे धार्मिक अनुष्ठान नहीं होना चाहिए? चैनल में अलग - अलग धर्म - जाति के लोग काम करते हैं ... उनकी भावनाओं का भी ख्याल रखना चाहिए . फिर यदि सुन्दर कांड होता है तो दूसरे धर्म से सम्बंधित कार्यक्रम भी होने चाहिए . सिर्फ सुन्दर कांड ही क्यों ?

मेरा
 नजरिया बिलकुल साफ़ है. धर्म और प्रोफेशन का घालमेल खतरनाक होता है. यदि कोई और प्रोफेशन होता तो शायद ऊँगली उठाने की उतनी जरूरत नहीं पड़ती. कोई फर्क भी नहीं पड़ता . लेकिन यह एक मीडिया संस्थान है . देश का एक समाचार चैनल है. कोई समाचार चैनल अपने प्रांगण में ऐसा आडम्बर कैसे कर सकता है. बात एक सुन्दरकाण्ड की नहीं , परम्परा के शुरुआत की बात है. यदि रोजा-इफ्तार भी होता तब भी उसका विरोध ही करता. आपकी धर्म में आस्था है व्यक्तिगत तौर पर करें. कोई ऐतराज नहीं.

दरअसल
 विषय सुन्दर कांड नहीं सुन्दर कांड के पीछे की मानसिकता है . सवाल है किसी ऐसे चैनल में जो अपने अपनी खबरों में धर्मनिरपेक्षता का दावा करता है, उसके चैनल दफ्तर के प्रांगण में किसी खास धर्मं का अनुष्ठान कितना जायज है ?

तीन
 साल से कुछ ऊपर हो गए न्यूज़24 को लॉन्च हुए. शुरूआती दौर से ही इस चैनल को कवर करता रहा हूँ. सुन्दरकाण्ड के अलावा किसी और धर्म का कोई अनुष्ठान कभी होते नहीं देखा . यहाँ के कुछ पत्रकारों से भी मेरी ऑफ रिकॉर्ड बात हुई , वे इस मामले को लेकर दुखित हैं. न्यूज़24 के कई पत्रकारों को दिक्कत हैं इनमें मुस्लिम और गैर मुस्लिम दोनों हैं. इसलिए यह मामला बनता है. सवाल उठता है - " न्यूज़ चैनल के भीतर पूरे ताम - झाम के साथ किसी भी धर्मं का अनुष्ठान करना कितना उचित है. ऐसे हालात में जब इससे कई दूसरे पत्रकारों की भावनाएं आहत होती है. उन्हें महसूस होता है कि उनके धर्म को इग्नोर किया जा रहा है और सिर्फ एक धर्म विशेष को तरजीह दी जा रही है."

सवाल 
के मर्म को समझने की जरूरत है. न्यूज़ चैनल का लायसेंस धर्मांधता फ़ैलाने के लिए नहीं दिया जाता. ऑफिस की छवि सेक्युलर होनी चाहिए. लेकिन न्यूज़24 में इस सेक्युलर छवि को सीधे – सीधे नुकसान पहुँचाया जा रहा है. इस मसले पर बड़ी त्रासदी है कि वहाँ के पत्रकार अपनी आवाज सामने आकर नहीं उठा सकते. आवाज उठाएंगे तो नौकरी से हाथ धोनी पड़ेगी. यह न्यूज़24 में तानाशाही रवैये की इंतिहा है.

परिचय : लेखक मीडिया खबर.कॉम के संपादक, संस्थापक हैं. मूलतः मुजफ्फरपुर, बिहार के रहने वाले , लेकिन जन्म बेगूसराय के भगवानपुर में. बचपन की सारी शिक्षा - दीक्षा दुमका , झारखण्ड में हुई. दिल्ली विश्वविधालय से वाणिज्य विषय में स्नातक. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की . कुछ समय तक दूरदर्शन से जुड़े. बाद में आईविज़न न्यूज़ प्राइवेट लिमिटेड और टीवी-9 से जुड़े और मुंबई में जमकर फ़िल्म पत्रकारिता की . बाद में दिल्ली वापस लौटकर मीडिया इंडस्ट्री पर आधारित पत्रिका "मीडिया मंत्र" को शुरू किया. फिर मीडिया खबर.कॉम के माध्यम से ऑनलाइन माध्यम में आ गए. अब ऑनलाइन माध्यम के जरिये ईमानदार पत्रकारिता करने की कोशिश कर रहे हैं. उठा - पटक जारी है - ईमानदार बने रहने की . संपर्क : 9999177575. EMAIL : pushkar19@gmail.com .

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