Monday, March 28, 2011

उत्तराखंड में दबंगो ने की दलित की हत्या

पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट विकास खण्ड क्षेत्र में पिछले 19 मार्च को दो दबंगो ने एक दलित की पीट-पीट कर हत्या कर दी। बीच-बचाव करने आई मृतक की पत्नी को भी दबंग सवर्णों ने लात-घूसों से मारा।

मृतक लक्ष्मण राम अपने भाई का बेरीनाग में दाह संस्कार करके शुक्रवार की शाम करीब साढ़े सात बजे चैली गांव में वाहन से उतरे तो वहां पर नशे में धुत चैली गांव के ही निवासी विक्की और नरेन्द्र ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। दोनों युवकों ने लक्ष्मण राम को लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटने के बाद 500 मीटर नीचे खेतों में फेंक  दिया, जिससे लक्ष्मण राम की मौत हो गयी।

इस घटना से गांव में दहशत का माहौल बन गया है। राजस्व पुलिस ने दोनों हत्यारोपी युवकों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। जांच-पडताल करने के बाद पता चला है कि हत्या का कारण पुरानी रंजिश थी,जिस कारण दोनों  युवकों ने लक्ष्मण राम की हत्या कर दी। लेचुराल जोशी गांव में अनुसूचित जाति की संख्या कम है और सामान्य जाति की संख्या ज्यादा है। 
लक्ष्मण की पत्नी हरूली  देवी : कहाँ है न्याय  

लक्ष्मण राम एक जागरुक व्यक्ति थे,उन्हें यह कतई बर्दाश्त नहीं था कि उनके गांव व क्षेत्र का अनियमित विकास हो। हत्यारोपी विक्की चैली गांव का उपप्रधान है। नाम न छापने की शर्त पर एक ग्रामीण ने बताया कि विक्की शुरु से ही आपराधिक किस्म का व्यक्ति है। विक्की और इसके साथी मिलकर गांव में अवैध खनन भी करते हैं,इसके साथ ही यह लोग विकास के पैसों की भी बंटरबांट करते हैं। लक्ष्मण राम पूर्व में भी इन सब के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। कुछ दिन पूर्व ही लक्ष्मण राम ने ग्राम विकास अधिकार व अन्य सरकारी कर्मचारियों के सामने इन लोगों की करतूतों का खुलासा किया था।

अधिकारियों के सामने निडर होकर लक्ष्मण राम ने कहा कि यह लोग अवैध खनन करते हैं। यह बात विक्की और उसके साथियों का नागवार गुजरी,इसलिए विक्की और नरेंद्र ने शराब के नशे में धुत होकर 19 मार्च को लक्ष्मण राम को लाठी-डंडो से पीट-पीट कर मार डाला। बदमाशों ने मृतक की पत्नी हरूली देवी को भी नहीं छोड़ा, उन्हें भी लात-घूसों से मारा और जाति सूचक गालियां दीं। हरूली देवी ने जब मदद के लिए गांव वालों को पुकारा तो उनकी मदद को कोई नहीं आया। हरूली देवी अपनी पति के लाश के पास पूरी रात अकेली बैठे रही।

हरूली देवी कहती हैं, ‘पति को पिटते देख जब मैं बीच-बचाव के लिए गयी तो उन लोगों ने मुझे भी मारा-पीटा। उन लोगों ने मुझसे कहा ‘तुझे भी जान से मार देंगे, तु यहां से चली जा, हम किसी से भी नहीं डरते‘। मैंने गांव वालों को मदद के लिए आवाज लगाई लेकिन गांव में इन लोगों का इतना आतंक है कि डर के मारे कोई भी मदद को आगे नहीं आया। मैं शाम साढ़े सात बजे से लेकर सुबह तक अपने पति की लाश के पास बैठी लेकिन कोई नहीं आया। इन लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

इस मामले में जिला पुलिस और जनप्रतिनिधि मौन साधे हुए हैं। पहले भी इस प्रकार की घटनायें घट चुकी हैं। ऐसे में साफ है कि राज्य में होने वाले दलित उत्पीड़न के मामलों में पुलिस कैसे अपने राजनीतिक आकाओं के का मूंह ताक रही है।



लेखक युवा पत्रकार है, उनसे  narendravagish@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है।

 
 

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