Tuesday, April 12, 2011

गांधीवादी अन्ना की नज़र में राज ठाकरे की दादागिरी ठीक


जन लोकपाल बिल के माध्यम से शहरी मध्यवर्ग को भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलित करने वाले अन्ना हजारे धीरे-धीरे अपनी वैचारिक पृष्टभूमि स्पष्ट करते जा रहे हैं। आंदोलन खत्म होने के बाद उन्होंने पहले 2002 गुजरात नरसंहार के दोषी नरेन्द्र मोदी और ट्रेजरी घोटाले में फंसे बिहार के मुख्यमंत्री की यह कह कर तारीफ की इन मुख्यमंत्रियों ने ग्रामीण विकास किया है। अब वह मुंबई में उत्तर भारतीय लोगों को मारने वाले राज ठाकरे के साथ खड़े दिख रहे हैं।
अन्ना हजारे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ‘‘ राज ठाकरे के कुछ विचार ठीकहैं। लेकिन सर्वजनिक और राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाना ठीक नहीं है।हजारे से जब यह पूछा गया कि राज ठाकरे के कौन से विचार ठीकहैं, तो उन्होंने साफ किया कि मुंबई में बाहरी लोग अपनी दादागीरीजमाने चाहते हैं, जो स्वीकार्य नहीं है।
हजारे ने कहा कि ‘‘उत्तर भारतीय क्षेत्रों वाली राजनैतिक पार्टियां जैसे समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल महाराष्ट्र में रैलियां करके अपना प्रभाव दिखाना चाहती हैं, जो स्वीकार नहीं किया जा सकता।’’ उन्होंने कहा कि इसके लिए उनके राज्यों में बहुत ज्यादा अवसर है।
जब उनसे महाराष्ट्र में रेलवे की परीक्षा देने आए बिहारी छात्रों पर राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नव निर्माण सेना मनसे के कार्यकर्ताओं द्वारा हमले पर सवाल किया गया तो उन्होंने तुरंत गांधीवादी चोला धारण करते हुए इसकी निंदा शुरू कर दी।
उन्होंने कहा कि ‘‘मैं राज ठाकरे की हर तरह की गतिविधियों का समर्थन नहीं करता। मनसे के लोग ऐसा करते हैं तो यह भारत की एकता के लिए ठीक नहीं है। हमें देश की एकता के लिए काम करना चाहिए। निर्दोष लोगों को मारने से ऐसा नहीं होगा।’’

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