Friday, April 15, 2011

एसटीएफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो


कचहरी धमाकों के सिलसिले में आफताब आलम अंसारी जिसकी मात्र 22दिनों में रिहाई और अब सज्जार्दुरहमान का दोषमुक्त होना यह बताता है कि यूपी सरकार आतंकवाद जैसे मसले पर मुस्लिमों को निशाना बना रही है...

मनवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) ने 2007 में यूपी की कचहरियों में हुए धमाकों में अभियुक्त बनाए गए कश्मीर के सज्जादुर्रहमान वानी के दोषमुक्त करार दिए जाने को उत्तर प्रदेश सरकार के मुंह पर तमाचा बताया है। पीयूसीएल ने कचहरी बम धमाकों की एनआईए से जांच की मांग को दोहराते हुए कहा कि सज्जार्दुरहमान मामले में लिप्त एसटीएफ अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाय।
पीयूसीएल के प्रदेश संगठन सचिव शाहनवाज आलम और राजीव यादव ने कहा कि कचहरी धमाकों के सिलसिले में आफताब आलम अंसारी जिसकी मात्र 22 दिनों में रिहाई हो गई थीके बाद सज्जार्दुरहमान का दोषमुक्त होना यह बताता है कि यूपी सरकार किस तरह से आतंकवाद जैसे मसले पर मुस्लिमों को निशाना बना रही है। उन्होंने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि कचहरी धमाकों के सिलसिले में पकड़े गए तारिक और खालिद की गिरफ्तारी पर उठे सवालों के दबाव में गठित आरडी निमेष जांच आयोग जिसे ६महीने के भीतर अपनी रपट सौंपनी थी आज तीन साल बाद भी उसका कुछ अता पता नहीं है।
हिंदुत्ववादी आतंकी गुटों की संलिप्तता प्रमाणित होने के बाद पीयूसीएल ने कहा कि 2007में भी हमने कहा था कि यूपी की कचहरियों में हुए धमाकों में हिंदुत्ववादी गुटों का हाथ है। फैजाबाद की कचहरियों में हुआ विस्फोट भाजपा के पदाधिकारियों महेश पांडे और विश्वनाथ सिंह के चौकियों पर हुए थे और ये दोनों ही विस्फोट के पहले ही चंपत हो गए थे।
इसी दौरान 25 दिसंबर को एडीजी बृजलाल ने कहा था कि यूपी कि कचहरियों में हुए विस्फोटों में इस्तेमाल की गई तकनीक और सामग्री हैदराबाद के मक्का मस्जिद में हुए विस्फोटों से मिलती जुलती है। तब ऐसे में आज तक यूपी सरकार ने हिंदुत्वादी संगठनों को संदेह के घेरे में रखकर क्यों नहीं जांच पड़ताल की।

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