Tuesday, May 03, 2011

हाय ! ओबामा तूने अपने अब्बा हुजूर को मार डाला




अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने 1979 में अफगानिस्तान में साम्यवादी सरकार को उखाड़ फेकने के लिये बहुत सारे मुस्लिम नवजवानों को गुमराह करके धार्मिक युद्ध का नाम देकर लड़ने के लिये प्रेरित किया था। अमेरिकी कुख्यात खुफिया एजेंसी सी.आई.ए ने हथियार ट्रेनिंग रुपया देकर नवजवानों को आतंकवाद के रास्ते पर जाने के लिये शिक्षित दीक्षित किया था। 1989 में अफगानिस्तान से सोवियत फौजों की वापसी हो गयी। जिससे सी.आई.ए द्वारा भावनात्मक रूप से गुमराह किये युद्धरत जवान बेरोजगारी में आना शुरू हो गए। इन नवजवानों के पास आतंक फैलाने के अतिरिक्त कोई दूसरा हुनर नहीं था। सी.आई.ए ने हथियारों की सप्लाई के बदले में व धन प्राप्त करने के लिये अवैध रूप से अफीम की खेती भी शुरू करवाई अफीम की खेती के पश्चात अफीम से मार्फीन व हेरोइन का निर्माण व तस्करी को भी संरक्षण दिया। 
उन्ही युद्धरत नवजवानों में सउदी अरबिया निवासी ओसामा बिन लादेन भी था। ओसामा बिन लादेन ने अमेरिकी शोषण तंत्र को समझा और अमेरिका के भयंकर विरोध में चला गया और उसने वही हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए जो अमेरिकी दूसरे देशों में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से करते हैं। चाहे वर्ल्ड ट्रेड सेण्टर पर बम गिराने के बाद 9/11 की घटना हो जिसमें लगभग 3000 लोग मारे गए थे कि घटना को अंजाम देने का आरोप भी ओसामा बिन लादेन पर आया।
सोमवार (मई) की रात एक बजे अमेरिकी सरकार व सी.आई.ए ने पकिस्तान सरकार को बगैर सूचना दिए इस्लामाबाद से 60 किलोमीटर दूर एबदाबाद में ओसामा बिन लादेन सहित चार लोगों को मार डाला। ओसामा की दो पत्नियों सहित 6 बच्चों को गिरफ्तार कर लिया ओसामा की लाश को अमेरिकी प्रचार एजेंसियों के अनुसार इस्लामिक रीति-रिवाजों के अनुसार समुद्र में दफना दिया गया है। दो अमेरिकी हेलीकाप्टर ने इस ऑपरेशन में भाग लिया जिसमें एक हेलीकाप्टर को मार गिराए जाने की बात आई है वहीँ यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिकियों ने स्वयं ही इसे नष्ट किया है। ओसामा के सिर में गोली मारी गयी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर के समय से ओसामा अमेरिकियों के नजदीक रहा है इस रिश्ते से बराक हुसैन ओबामा का अब्बा हुजुर हो सकता है और 1989 से जब ओसामा अमेरिकियों के लिये अनुपयोगी हो गया और प्रतिरोध पर उतर आया तो उसकी हत्या उसके घर में जाकर कर दी गयी है। ओसामा के पकिस्तान में रहने की सूचना वहां की सरकार, आई.एस.आई और उनके आकाओं को भी रही होगी आज जब अमेरिकी मध्य एशिया में फंसे हैं तो ओसामा का वध करके दुनिया के विरोधी राष्ट्राध्यक्षों को भी एक नया सन्देश जारी किया जा रहा है। रहने सबसे ज्यादा दिक्कत पकिस्तान की सर्व भौमिक तथा संप्रभु सरकार की है जिसकी बगैर जानकारी के राजधानी इस्लामाबाद के नजदीक ऑपरेशन हो रहा हो और उनको सूचना न हो। अब आप इस बात से अंदाजा लगा लीजिये कि पकिस्तान में कैसी संप्रभु सरकार है। सी.आई.ए की उपशाखा आई.एस.आई को भी इस ऑपरेशन की भनक नहीं लगी। अमेरिकन साम्राज्यवादी शक्तियों के आगे संप्रभुता नाम की चीज नहीं है। उसके हित ही महत्वपूर्ण है। मुंबई आतंकी घटना के समय हमारे देश से भी अमेरिका की कुख्यात खुफिया एजेंसी एफ.बी.आई ने चश्मदीद गवाह अनीता उददैया को सरकार की जानकारी के बगैर अमेरिका लेकर चले गए थे और बाद में वापस छोड़ गए थे। अमेरिकी और खुफिया एजेंसी सी.आई.ए पाकिस्तान समेत अधिकांश देशों को अपना उपनिवेश बना रखा है।

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