Friday, May 06, 2011

मैं मणिपुरी हूं और मणिपुर में जंगल का कानून चलता है - सलाम बिजेन सिंह



मैं एक मणिपुरी हू। और इस नाते महसूस करता हूं कि मणिपुर के लोग खुद को भारत से कटा हुआ और अजनबी महसूस करते हैं। उन्हें जब कोई इंडियन कहता है तो उन्हें ये थोपा हुआ लगता है। वजह सिर्फ इतनी है कि आप जैसा बर्ताव करेंगे, वैसा ही असर होगा।

मणिपुर में उस कानून का राज है, जो जंगल में रहने वाले जानवरों के लिए होता है। यानी जंगल का कानून। मसलन, अफसपा। इस कानून के तहत किसी को भी गोली मारना, पकड़ कर जेल में डाल देना और महिलाओं का बलात्कार करना एक आम घटना है। सेना के जवान जवाब देते हैं कि वह आतंकवादी था, इसलिए ये सब किया है। मुख्यमंत्री ने यहां तक कहा था कि मारने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। लेकिन सच तो सामने आ ही गया था कि आतंकवादी के नाम पर लोगों पर जुल्म ढाये जा रहे हैं। तहलका ने 12 तस्वीरें छाप कर पर्दाफाश कर दिया था।
सब के पास समानता का अधिकार है। भारत जितना हिंदी भाषियों का है, उतना ही अहिंदीवासियों का भी है। रही बात राजनीति की तो मणिपुर में कांग्रेस की सरकार है। यह दूसरी बार बनी है। मगर, प्रदेश की सरकार ने मानो आंख-कान बंद कर लिये हैं। प्रदेश की सरकार ही ध्यान नहीं दे रही है, तो केंद्र सरकार क्या करेगी। इन दस सालों में आज तक किसी भी बड़े नेता या अधिकारी ने इनकी समस्यााओं पर गौर करना मुनासिब नहीं समझा। यह कभी नहीं हुआ। आंकड़ों में दिखता कुछ और है और जमीनी हकीकत कुछ और। इसका जीता जागता उदाहरण है इरोम शर्मिला का अनशन।
इरोम के अनशन को दस साल हो गये। अफसपा के खिलाफ। आज तक केंद्र की तरफ से कोई पहल नहीं हुई। न किसी ने जानने-समझने की कोशिश की। उसका अनशन अभी भी उम्मीद की आस लिए जारी है। अगर पूर्वोत्तर राज्यों खास कर मणिपुर को राष्ट्रीय मुख्यधारा में लाना है तो सरकार को अपनी सोच और नजरिये में बदलाव लाना होगा। उनकी समस्याओं को समझना और सुनना होगा। उनके करीब जाकर दिल में जगह बनानी होगी।


bijen
(सलाम बिजेन सिंह। मणिपुर के बिश्‍नुपुर में जन्‍म। मछुआरा परिवार। हिंदी सीखने देवघर हिंदी विद्यापीठ आये। पढ़ाई अधूरी छोड़ कर पत्रकारिता शुरू की। प्रभात ख़बर, दैनिक भास्‍कर, हिंदुस्‍तान के बाद फिलहाल चौथी दुनिया के साथ जुड़े हैं। इंदिरा गांधी मुक्‍त विश्‍वविद्यालय से छूटी हुई पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। उनसे sbijensngh@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

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