Monday, May 23, 2011

मेरा धर्म का विश्वास - Mamta Singh




मेरा नाम ममता सिंह है मै कानपूर के शुक्लागंज की रहने वाली हु मेरा मायका इलाहाबाद के पास फूलपुर के एक गाव में है मेरे शादी को १० साल हो चुके है मेरा एक बेटा है और २ बिटिया है मेरे पति के साथ मै ख़ुशी ख़ुशी रहती हु सास ससुर कोई नहीं है दोनों का देहांत हो चूका है मेरे पति अपने पिता के अकेली औलाद है. और उनका किराने का काम है घर में अक्सर वो अपने लैपटॉप से फसबूक पर काम करते थे कभी कभी मै भी कर लिया करती थी कल मेरे पति ने सत्यमेव जयते में एक लेख देखा और मुझे भी पढवाया लेख पढ़ कर बड़ा अटपटा लगा की कोई मेरे धर्म से बहार का व्यक्ति हमारे धर्म के बारे में हमको बता रहा है मै भी पढ़ी लिखी हु और अध्यापिका हु एक इंटर कालेज में और मैने भी संस्कृत से पढाई की है (मै यहाँ सामाजिक दबाव ना पडे इसीलिए अपने पति का नाम नहीं लिखा है ) मै और मेरे पति ने खाना खाकर उस लेख को दुबारा पढ़ा जिसमे यह लिखा हुआ था कि कल्कि अवतार मुहम्मद साहब है और फिर वेद जो मेरे ददिया ससुर कि घर में रक्खी हुई थी उसका अध्यन करना चालू किया कि इसको तगड़ा जवाब देना है परन्तु घंटो अध्यन के बाद हमको जो मिला वह हमारे लिए नया था क्योंकि हमने कभी वेद नहीं पढ़ा था हमको लेख कि पूरी सत्यता मिल गई हमारी नींद उड़ चुकी थी | सोने का प्रयास विफल रहा और हम दोनों फिर से उठ गए और यह अध्यन करना चालू किया कि मुहम्मद साहब का जीवन कुछ ना मिला तो मेरे पति ने अपने एक मुसलमान दोस्त सकील भाई को फ़ोन किया रात के २ बजे थे वो घबरा गए और मेरे पति ने कारन बताया और कहा कि मुझे उनकी जीवनी चाहिए वो पास ही रहते है और थोड़ी देर में आकार २ किताब दे गए हमारी बेचैनी इतनी थी कि हम रात में ही पढ़ने बैठ गए और सुबह तक पढ़ते रहे ऐसा लगता था जैसे वो संत हमारे सामने खडे हो सुबह हो चुकी थी मगर किताब ख़तम ना हुई थी अजान बोली जाने के १ घंटे के बाद हम दोनों पति पत्नी मज्जिद के मुल्ला साहब जिनकी उम्र ८० बरस होगी से मिलने गए वो मज्जिद से कही जा रहे थे जब उनको हमारे आने का कारण पता चला तो वो रुक गए और उन्हों ने मुहम्मद साहब कि सारी जीवनी बताई हम सुबह के ८ बजे तक वही थे हमने पूछा कि अगर हम धर्म अपनाना चाहे तो क्या राये है आपकी ओ वह हमको समझाय कि बेटा धर्म सब एक है और बहुत कुछ समझा कर हमको वापस भेज दिया
अब हम दोनों ने यह निर्णय किया है कि जो सत्य है हम उसके हिसाब से चलेंगे और हमने धर्मपरिवर्तन का निर्णय लिया है हम अपना ये मकान बेच कर इलाहाबाद शहर चले जायेगे और इस्लाम को अपना कर वह अपना जीवन यापन करेगे मैने यह इस लिए लिख दिया यह हमारा अंतिम निर्णय है और हम दो दिनों के अन्दर यहाँ से चले जायेगे क्यों कि मकान का सौदा पहले ही हो चूका है मेरे पति ने इलाहबाद में एक मकान जो मेरे पापा ने मेरे नाम लिखा है जाने कि तय्यारी पूरी कर ली है
हमदोनो कल देख रहे थे कि जिसने वह लेख लिखा था तरिकुए ने वह तो कुछ नहीं बोल रहे थे परन्तु उनको कितनी गन्दी गन्दी गालिया लोग दे रहे थे जो धर्म ऐसा संस्कार देता है वो सत्य धर्म नहीं हो सकता है इश्वर कि दया है कि हमारे बच्चे सच्चे धर्म पर चलेंगे तरिकुए जी आपका धन्यवाद जो आपने हमको सही धर्म का रास्ता दिखाया और उनका भी धन्यवाद जो उनको गालिया और गन्दा फोटो भेजे थे उसी से हमको सत्य जानने कि प्रेरणा मिली है मैने अपनी बेटियों का नाम भी सोचा है नया आपलोग अपनी राये बताइयेगा सकील भाई कि बिटियो का भी वही नाम है मरियम और फातिमा बेटे का नाम नहीं समझ आरहा है पति जी ने कहा कि तरिकुए रखते है मगर हमे नाम नहीं समझ आया आज रात को मुल्ला साहब ने बुलाया है धर्म ग्रहण करवाने को सच हम बहोत खुस है.
धन्य वाद तरिकुए जी

5 comments:

  1. झूठ है
    सच्चे है तो अपना सही पता दे ताकि तस्दीक की जा सके
    जब अपना घर छोड़ कर दूसरी जगह बस गए है तो डर किस बात का

    ReplyDelete
  2. झूठ है
    सच्चे है तो अपना सही पता दे ताकि तस्दीक की जा सके
    जब अपना घर छोड़ कर दूसरी जगह बस गए है तो डर किस बात का

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  3. झूठ है
    सच्चे है तो अपना सही पता दे ताकि तस्दीक की जा सके
    जब अपना घर छोड़ कर दूसरी जगह बस गए है तो डर किस बात का

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  4. झूठ है
    सच्चे है तो अपना सही पता दे ताकि तस्दीक की जा सके
    जब अपना घर छोड़ कर दूसरी जगह बस गए है तो डर किस बात का

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