Monday, June 13, 2011

पुलिस फ़ायरिंग के बाद लोग दहशत में




बिहार पुलिस(फ़ाईल फ़ोटो)
बिहार के अररिया ज़िले के फ़ॉरबिसगंज ब्लॉक के भजनपूर गांव में हुई पुलिस फ़ायरिंग के एक सप्ताह बाद भी लोग ख़ौफ़ के साये में जी रहें हैं.

यह कहना है गांव के एक निवासी फ़ारूक अंसारी का.फ़ारुक अंसारी की पत्नी भी पुलिस फ़ायरिंग में मारी गई थीं.

तीन जून को फ़ॉरबिसगंज ब्लॉक के भजनपूर गांव में पुलिस ने गांव से निकल रहे एक रास्ते को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोली चलाई थी जिसमें कम से कम चार लोग मारे गए थे.

मरने वालों में एक गर्भवति महिला और एक सात महिने का बच्चा भी शामिल हैं.

इस बीच राज्य सरकार ने न्यायाकि जांच के आदेश दे दिए हैं.

लेकिन पुलिस की इस कथित बर्बरता के बारे में जब राज्य के गृह सचिव आमिर सुभानी से बीबीसी ने बात की तो उन्होंने कहा, "सरकार ने न्यायाकि जांच के आदेश दे दिए हैं इसलिए मैं इस बारे में प्रेस से कोई बात नहीं कर सकता. मुझे जो कहना है वो मैं कमीशन के सामने कहूंगा."

मामला
दर असल पूरा मामला ये है कि भजनपूर गांव के आस-पास की ज़मीन को सरकार ने अधिग्रहण कर एक निजी कंपनी ऑरो सुंदरम इंटरनेश्नल कंपनी को दे दिया.

गांव वाले ज़मीन अधिग्रहण का तो विरोध नहीं कर रहे थे लेकिन अधिग्रहित की गई भूमि से होकर ही गांव से बाहर जाने का रास्ता था. गावं वाले चाहते थे कि उनके रास्ते को बंद नहीं किया जाए.

"सरकार ने न्यायाकि जांच के आदेश दे दिए हैं इसलिए मैं इस बारे में प्रेस से कोई बात नहीं कर सकता. मुझे जो कहना है वो मैं कमीशन के सामने कहूंगा"
आमिर सुभानी, राज्य के गृह सचिव

रास्ता बंद होने के कारण उन्हें स्थानीय बाज़ार, ईदगाह या अस्पताल जाने के लिए दूसरे रास्ते से घुमकर जाना पड़ता जिसके लिए उन्हें पांच से सात किलोमीटर चलकर जाना पड़ता.

इस सिलसिले में ज़िला प्रशासन से बातचीत चल रही थी.

एक जून को प्रशासन और कंपनी के अधिकारियों की मौजूदगी में गावंवालों से बातचीत हुई और मामला सुलझ गया था.

कंपनी गांव वालों को बग़ल से एक दूसरा रास्ता देने को तैयार हो गई थी.

लेकिन गांव वालों के अनुसार दूसरे दिन यानि दो जून को कंपनी ने उनका रास्ता बंद करने के लिए दीवार खड़ी करनी शूरु कर दी.

ये बात आग की तरह फैल गई और तीन जून को गांव वालों ने इसका विरोध किया. तीन जून शुक्रवार था और जुमे की नमाज़ के बाद सैकड़ों गांव वालों ने रास्ता रोकने के लिए बनी दीवार तोड़ दी, पथराव किया और एक जीप को आग लगा दी.

जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने फ़ायरिंग की जिसमें कम से कम चार लोग मारे गए.

पुलिस ने शाज़मीन ख़ातून को कुल छह गोलियां मारी जिनमे चार उनके सिर में मारी गई थी.शाज़मीन पांच महीने की गर्भवति थीं.
फ़ारुक़ अंसारी, पुलिस फ़ायरिंग में मारी गई शाज़मीन ख़ातून के पति
फ़ारूक अंसारी ने बीबीसी से बातचीत के दौरान बताया कि हंगामें की ख़बर सुनते ही उनकी पत्नी शाज़मीन ख़ातून उनकी ख़ैरियत जानने के लिए कंपनी की ओर गई.फ़ारूक अंसारी वहीं एक कंपनी में काम करते हैं.

फ़ारुक के अनुसार पुलिस ने शाज़मीन ख़ातून को कुल छह गोलियां मारी जिनमे चार उनके सिर में मारी गई थी.शाज़मीन पांच महीने की गर्भवति थीं.

गांव वालों के अनुसार एक दूसरी महिला अपने बच्चे को लेकर दवा लाने जा रही थी,तभी पुलिस ने उन पर भी गोली चलाई.

गोली चलाने के कारण उनके गोद में मौजूद सात महीने के नौशाद अंसारी की मौत हो गई और वो महिला घायल हो गई.फ़िलहाल पटना के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है.

'दहशत'
फ़ारुक अंसारी ने बताया कि पुलिस ने गावं वालों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर रखा है जिसके कारण गावं वाले डरे सहमें हुए हैं और पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करना तो दूर, गांव वाले गिरफ़्तारी के डर से भागे फिर रहें हैं.

एक पत्रकार मुमताज़ आलम फ़लाही, जो इन दिनों फ़ॉरबिसगंज में हैं, ने बीबीसी को बताया कि पुलिस ने लगभग चार हज़ार लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर रखा है जिसके कारण पूरा गांव दहशत के माहौल में है.

मुमताज़ एक अंग्रेज़ी न्यूज़ वेबसाइट में काम करते हैं और मारे गए लोगों की लाश का विडियो उन्होंने अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया था.

उस विडियो में एक जवान को गोली से ज़ख़्मी होकर ज़मीन पर गिरे एक व्यक्ति के शरीर पर पैर से मारते हुए दिखाया गया है.

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