Sunday, June 12, 2011

चूल्हा भी नहीं जला भजनपुर गांव में पूरे गांव में छाया मातमी सन्नाटा




अररिया शनिवार की दोपहर..। गांव भजनपुर। गांव की सीमा से ठीक पहले पुलिस का भारी बंदोबस्त। परंतु गांव की गलियां बिल्कुल सुनी, आंगन भी सूना, जहां तहां आंखों में आंसू लिए खूनी आंखों से निहारती महिलाओं व बच्चों की टोली, सभी के चेहरों पर मायूसी और हर आने जाने वालों से शक की निगाहों से घूरती आंखे और जुबान पर एक ही वाक्य या अल्ला.. ई का हो गया..। शनिवार को कुछ ऐसा ही दृश्य का भजनपुर गांव का। पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा था।
सदमा इतना गहरा कि किसी के घर चूल्हा नहीं जला। बच्चे, बूढ़े सभी अवाक थे कि ये क्या हो गया। उन्हें क्या पता था कि आने जाने के लिए रास्ते की मांग पर उन्हें मौत दी जायेगी। पुलिस की गोली के शिकार एक दो नहीं बल्कि चार जने हुए है जिनके शव से लिपटकर परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मरने वालों में दो तो गबरु जवान थे तथा परिवार का सहारा थे। जबकि गर्भवती महिला और एक अबोध बालक शामिल है। सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शनिवार को उनके परिजन शव को भजनपुर लाये थे। शनिवार को दोपहर तक सभी शव उनके आंगन में ही रखे थे। कफन, दफन नहीं किया जा सका था। मृतक मुस्तफा अंसारी के पिता फुटकन अंसारी कहते है कि उनका 25 वर्ष का जवान बेटा ही उनका सहारा था। वह तो लोगों के साथ रास्ता मांगने कंपनी परिसर गया था लेकिन पुलिस ने उसे गोलियों से भून दिया। यहीं बात मुख्तार अंसारी के पिता फारूख अंसारी भी कर रहे थे। जबकि गोलियों का शिकार हुए 9 माह के नौशाद की मां रेहाना खातून कह रही थी, मेरे अबोध बालक ने किसी का क्या बिगाड़ा था। पुलिस उसे ही मार देती, बच्चे को क्यों मारा..। वहीं कुछ ग्रामीण एक आठ नौ साल का बच्चा के गुम हो जाने की बात कह रहे थे। वे लोग कह रहे थे कि गोली कांड के बाद से वह लापता है। कोई उसे ढूंढ के ला दो। पूरे गांव में जैसे कोहराम मचा था। सुबह से किसी के मुंह में अनाज का एक दाना भी नहीं गया था। क्यों कि दिन में किसी के घर चुल्हा नहीं जला। पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ था।

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