Friday, June 24, 2011

तालीम के बिना कोई भी समाज तरक्की नहीं कर सकता.




कांग्रेस पार्टी पूरी मेहनत से मुसलमानों के वोट हासिल करने के लिए जुट गयी है. जब से डॉ मनमोहन सिंह की सत्ता स्थापित हुई है, मुसलमानों के हित के बारे में गंभीरता से चर्चा हो रही है. सच्चर कमेटी का गठन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम माना जाता है. अब कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने साम्प्रदायिक हिंसा पर काबू पाने की कोशिश करने की दिशा में एक बड़ा क़दम उठा दिया है. राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् ने साम्प्रदायिक हिंसा कानून को पास कराने की दिशा में पहल कर दिया है. उम्मीद है कि यह कानून बन भी जाएगा. इसके पहले अल्पसंख्यकों के लिए वजीफों की व्यवस्था करके सरकार ने मुसलमानों को अपनी तरफ आकर्षित करने की पूरी कोशिश की थी. जिसके नतीजे भी सामने आने लगे हैं. देश में एक ऐसा माहौल बन रहा है कि संजय गाँधी के दौर में जो मुसलमान कांग्रेस से दूर चले गए था अब वही मुसलमान फिर कांग्रेस की तरफ देखने लगा है. यह भी सच है कि बिहार और शायद उत्तर प्रदेश में भी अभी मुसलमानों के वोट कांग्रेस को नहीं मिलने वाले हैं क्योंकि इन राज्यों में कांग्रेस एक बहुत की कमज़ोर जमात है. इसके बावजूद भी कांग्रेस और यू पी ए की सरकारें मुसलमानों के हित बात सोच रही हैं. इस सारी सोच में एक पहलू बहुत ही निराशाजनक है. कांग्रेस के नेता मुसलमानों का ध्यान वहीं रखते हैं जहां उन्हने मुसलमानों के वोट की ज़रुरत है. बाकी इलाकों में सब कुछ खाली खाली ही रहता है. ऐसी हालत में मुसलमानों की सर्वांगीण तरक्की की बात अभी बहुत दूर की कौड़ी नज़र आती है. सरकारी और राजनीतिक उपेक्षा का एक बड़ा उदाहरण दिल्ली के बिलकुल करीब मेवात का इलाका है. गुडगाँव की मेट्रोपोलिटन आबादी से लगा हुआ यह इलाका अभी अठारहवीं सदी की ज़िन्दगी जीने के लिए मजबूर है. लड़कियों की तालीम का बंदोबस्त अभी संतोष जनक नहीं है. अभी भी सामाजिक न्याय यहाँ के लोगों के लिए एक सपने से ज्यादा नहीं है. लेकिन पिछले दिनों कुछ हाई प्रोफाइल राजनेता यहाँ पधारे. खुद सोनिया गाँधी वहां गयीं. और जो हालात देखीं उन्हें भी विश्वास नहीं हुआ. कांग्रेस ने अपने कुछ ऐसे नेताओं को भी भेजा जिनका मुसलमानों की तालीम के क्षेत्र में ख़ासा योगदान है. अब पता चला है कि वहां वक्फ की ज़मीन पर एक इंजीनियरिंग कालेज शुरू किया जा रहा है जिसमें दस फीसदी सीटें मेवात के लोगों के लिए रिज़र्व होंगीं.यह बड़ी शुरुआत है. पता चला है कि मेवात में ही एक मेडिकल कालेज शुरू करने की योजना बन चुकी है और उसमें भी मेवाती बच्चों को दस फीसदी सीटें देने का मन बना लिया गया है. लेकिन इस से कुछ नहीं होने वाला . यह इलाका आर्थिक रूप से बहुत पिछड़ा है. यहाँ जो हाई स्कूल हैं उनमें किसी में भी साइंस का टीचर नहीं है. सवाल पैदा होता है कि अगर इस इलाके के बच्चे साइंस की तालीम में बिलकुल जीरो रहेगें तो इंजीनियरिंग या मेडिकल की पढाई कैसे करेगें. 
हालांकि यह संतोष की बात है कि सरकारी पहल के चलते इस इलाके में शिक्षा की तरक्की के कुछ ज़रूरी क़दम उठाये जा रहे हैं लेकिन जब तक इलाके के लोग खुशहाल नहीं होंगें तब तक कुछ नहीं होने वाला है. इस इलाके में रहने वाले लगभग सभी लोग खेती पर निर्भर हैं. लेकिन बाकी देश में किसानों को जो सरकारी सुविधाएं उपलब्ध हैं वे यहाँ के किसानों के लिए नहीं हैं. पता नहीं सरकारी बैंकों ने क्या नियम बना रखा है कि मेवात के लोगों को खेती के लिए ज़रूरी क़र्ज़ नहीं मिलता. अजीब बात यह है कि इस हालत को किसान और सरकारी अफसर बदलने के बारे में सोचते ही नहीं हैं. इस पूरे इलाके में कहीं भी बीज उपलब्ध कराने का लिए कोई केंद्र नहीं हैं. पानी बहुत ही खारा है. ३-४ सौ फीट की गहराई तक का पानी ऐसा नहीं है जिसे पीने या किसी अन्य काम के लिए इस्तेमाल किया जा सके. इसलिए किसान खेती के लिए बारिश के पानी पर पूरी तरह से निर्भर हैं. सरकार को चाहिए कि इस इलाके में बहुत गहरे जाकर पानी की तलाश करे और फिर उसी पानी को पीने और अन्य कार्यों के लिए इस्तेमाल करने की व्यवस्था करे. लेकिन ऐसा कहीं कुछ नहीं हो रहा है. 
अपने मेवात यात्रा के दौरान यू पी ए की अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने सामाजिक तरक्की के सबसे अहम पहलू पर सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र में काम करने वालों का ध्यान खींचा था. दरअसल उनकी यात्रा के दौरान कांग्रेस सरकार ने 'जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम' को फोकस में लिया था. यह राष्ट्रीय ग्रामीण हेल्थ मिशन का गर्भवती महिलाओं के लिए शुरू किया गया एक कार्यक्रम है. मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुडा वहां मौजूद थे. उनके साथ हरियाणा की पूरी सरकार वहां हाज़िर थी. १ जून के अपने कार्यक्रम में सोनिया गाँधी ने मेवात के एक सौ दस गाँवों के लिए पीने के पानी की एक परियोजना की भी शुरुआत की. किसी भी समाज के विकास में वहां की महिलाओं की तरक्की की सबसे प्रमुख भूमिका होती है. ज़ाहिर है कि कांग्रेस ने मेवात जैसे पिछड़े इलाके में यह पहल करके एक अहम राजनीतिक चाल चल दी है जिसके उसे पक्के तौर पर राजनीति लाभ होगा. मुस्लिम राजनीतिक के जानकार जानते हैं कि उत्तर भारत के बहुत सारे इलाकों में इस्लाम के प्रचार के लिए जो जमातें जाती हैं उनमें भी बड़ी संख्या में इस इलाके के लोग शामिल होते हैं. ज़ाहिर है उनके पाने गाँव में जो भी विकास की कहानी देखने को मिल रही है वे उसका भी ज़िक्र अपनी तकरीरों में ज़रूर करेगें. ऐसा लगता है कि कांग्रेसी राजनीति के मैनेजरों की नज़र इन बातों पर भी होगी. 
इस बात को मानने के बहुत सारे अवसर हैं कि कांग्रेसी नेता चुनावी राजनीति के लाभ को ध्यान में रख कर इस तरह की पहल कर रहे हैं लेकिन इस बात में दो राय नहीं है इस पहल से एक बहुत ही पिछड़े इलाके के पिछड़े मुसलमानों का फायदा होगा .ज़रुरत इस बात की है कि इस पहल को बाकी देश में भी नक़ल किया जाए. और लागू किया जाए. ख़ासकर शिक्षा के हलके में होने वाली तरक्की को हर इलाके में दोहराया जाए क्योंकि तालीम के बिना कभी भी कोई भी समाज तरक्की नहीं कर सकता.

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