Monday, October 17, 2011

नरेद्र मोदी से लेकर संजीव भट्ट तक प्यादों का खेल



गुजरात दंगो के दौरान वहां के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलिस ऑफिसर्स को आदेश जारी किया था कि दंगाइयों को छूट दी जाए और मुसलमानों की मदद ना की जाए। ये राज़ खोला गुजरात के एक आईपीएस ऑफिसर संजीव भट्ट ने जिनका दावा है कि जब नरेंद्र मोदी ये घिनौना आदेश दे रहे थे तब वो भी वहां मौजूद थे। इतना ही नहीं संजीव भट्ट ने नरेद्र मोदी की यह नापाक साज़िश सुप्रीम कोर्ट तक में बेनक़ाब कर डाली। इसके बाद वही हुआ जो हो सकता था। संजीव भट्ट को नौकरी से हाथ धोना पड़ा और उन पर कई संगीन आरोप जड़ दिये गये। उन्ही के एक प्यादे यानि जूनियर पुलिस वाले ने संजीव भट्ट पर जबरदस्ती शपथपत्र बनाने के आरोप लगा दिये। और संजीव भट्ट को गिरफ्तार कर लिया गया। जिस गुजरात में नरेद्र मोदी पर हज़ारों बेगुनाह मुसलमानों की हत्या के आरोप लगे उसी गुजरात की जनता ने एक बार फिर नरेद्र मोदी की निर्दयी और निरंकुश चेहरा देखा यानि संजीव भट्ट को जेल में डाल दिया गया। नरेद्रं मोदी की असलियत को बेनक़ाब करने की जितनी सज़ा संजीव भट्ट ने पाई उससे भी कहीं ज्यादा उनके परिवार को मिली। एक आईपीएस की पत्नि और बच्चों ने देखा कि किस तरह एक मामूली कॉंस्टेबल भी दंनदनाता हुआ जांच और घर की तलाशी के नाम पर पूरे परिवार को अपमानित करने का हौंसाल दिखा सकता है।
हमेशा सम्मान और सैल्यूट में पले बढ़े परिवार में पत्नि और बच्चों के अलावा संजीव के घर के बुजुर्गों को भी संजीव भट्ट की ईमानदारी की सज़ा घुगतनी पड़ी। लगभग 18 दिनों तक संजीव भट्ट जेल की काल कोठरी में कैद रहे इस दौरान आरोप है कि नरेद्र मोदी कोशिश करते रहे कि संजीव भट्ट समझौता कर ले और अपने बयान को वापस लेलें। लेकिन संजीव भट्ट ने साफ कर दिया कि चाहे सारी जिंदगी जेल में गुज़र जाए मगर मोदी के नापाक चेहरे से कोई समझौता नहीं होगा। बहरहाल संजीव भट्ट के परिजन अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ अदालत की चौखट पर गये जहां से उनको ज़मानत पर रिहा कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण मे इतना तो जगजाहिर हो ही चुका है कि नरेद्र मोदी को ना तो क़ानून को खौफ है और न ही इंसानियत का। क्योंकि जिस मुख्यमंत्री के कार्यकाल में हज़ारो बेगुनाह इंसान सरेआम सड़क कर कत्ल कर दिये जाएं वही अपनी पुलिस को पीड़ितों की मदद से रोके और दंगाईयों को मदद करने के आदेश जारी करे तो इससे बुरा और क्या होगा। लेकिन संजीव भट्ट ने जिस तरह से अपने हौंसले और इंसानियत का परिचय देते हुए मोदी को बेनक़ाब किया उससे लगता है कि अभी इंसाफ और इंसानियत मौजूद है। साथ ही जिस तरह से मोदी के एक मामूली प्यादे की हैसियत रखने वाले संजीव भट्ट ने नरेद्र मोदी की सलतनत की नींव को हिला कर रख दिया है उसी तरह से संजीव के एक प्यादे की मदद से मोदी ने भी संजीव भट्ट को दबाव मे लेना तो चाहा था मगर संजीव भट्ट के हौंसले ने साबित कर दिया कि प्यादे लड़ते ज़रूर हैं मगर जीतता हौंसला और ईमानदारी ही हैं। जिसका सबूत है कि लाख कोशिशों के बावजूद नरेंद्र मोदी संजीव भट्ट को झुका नहीं सके और संजीव भट्ट जेल से बाहर भी आ गये ये अलग बात है कि मोदी के लिए आने वाले दिन शायद अब इतने खुशगवार ना रहें। क्योंकि हज़ारों बेगुनाहों की मौत की चीखों समेत ज़किया जाफरी की पीड़ा और एहसान जाफरी की मौत से मोदी कभी भी भाग नहीं सकते।

2 comments:

  1. Dear Friend can I ask you a question???
    aapke vichaar kya hai godhara me maare gaye hinduo k baare me?? unke baare me jo train me zinda jala diye gaye?? Un kashmiri pandito k baare me jinka narsanhaar khooleaam hota aya hai aur abhi bhi badastoor jaari hai??
    un logo ka jo rehte khate jeete yahan hai aur gaatr pakistan zindabad hai??
    aatankgadh(azamgarh) k 00n logo se jo hinduo k upar sirf iss liye thook dete hai kyuki wo hindu hai???
    ya unske baare me jo muhharam me hathiyaro ka pradarshan karte hai aur navratro me shanti poorvak ja rahi murtiyo pe chappal ande joote phekte hai?? aur virodh karne par katl-e-aam macha dete hai??

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    1. मेरा विचार है के जो भी अपराधी है उसे सजा होनी ही चाहिए!,
      लेकिन आप संघी लोग नहीं सुधरोगे अपने पैर में कोढ़ है उसे नहीं देखतें हो, दुसरे का कोढ़ दिखा कर अपने हिर्दय को तसली देते हो के मेरे में कोढ़ तो हैं पर उनमे भी है !!

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