Monday, November 28, 2011

पाकिस्तान का साम्राज्यवादियों के साथ रहने का हश्र



पाकिस्तान के बनने के बाद से ही वह अमेरिकी साम्राज्यवाद के साथ रहा है। साम्राज्यवादियों ने पाकिस्तान के विकास को पूरी तरह से अवरुद्ध किया और आर्थिक रूप से अपना गुलाम बना लिया। अफगानिस्तान के बहाने अब वह पाकिस्तान की संप्रभुता को पूरी तरह से नष्ट करने पर तुला हुआ है। जिसकी परिणिति ओसामा के एनकाउन्टर के रूप में हुई है और हद तो तब हो गयी कि जब अभी नाटो सेनाओं ने 28 पाकिस्तानी सैनिको को मार गिराया। इस नाटो हमले में काफी सैनिक घायल भी हुए हैं। पाकिस्तान बेचारा कर भी क्या सकता है। विरोध जताया उधर से माफ़ी नामा तुरंत आ गया। ब्रिटिश भारत में भी जिस राजा को तुरंत परास्त नही किया जा सकता था। उसके साथ भी इसी तरह की हरकतें ब्रिटिश साम्राज्यवादी करते थे और जब राजा विरोध करता था तो माफ़ी मांग लेते थे और फिर उसके बाद ब्रिटिश सेनायें के ताकतवर होते ही उस राज्य को अपने में मिला लेते थे।
पाकिस्तान के पास अमेरिकियों व नाटो सेनाओं से बचने का कोई विकल्प बाकी है तो वह चीन के साथ दोस्ती ही है। चीन की दोस्ती से उसकी लाज शायद ही बच सके क्यूंकि चीन भी उसकी रक्षा करने के लिये युद्ध में जाना पसंद नही करेगा।
साम्राज्यवाद मगरमच्छ है प्रतिदिन उसको भोजन के लिये मगरमच्छ की तरह मांस की आवश्यकता है। साम्राज्यवाद प्राकृतिक स्रोत्रों के दोहन के लिये उसको दुनिया के अधिकांश देशों को गुलाम बनाना उसकी मजबूरी है। भोजन के लिये दोस्त और दुश्मन का फर्क यहीं ख़त्म हो जाता है।

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