Monday, July 23, 2012

धीरे-धीरे सुलग रही है राजधानी, अकबराबादी मस्जिद पर पहुंचे 12 हजार लोग



जामा मस्जिद स्थित सुभाष मैदान पर अब भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। एनएमसीडी द्वारा सुभाष मैदान को सील किए जाने के बाद से ही पुलिस और एक समुदाय के लोगो के बीच रुक-रुक कर झड़प जारी है।

सुभाष मैदान के अंदर सीआरपीएफ और बाहर दिल्ली पुलिस व सीआरपीएफ के जवानों की भारी संख्या के बाद भी दोपहर 2.20 बजे फिर आधा दर्जन युवक दीवार को फांद कर विवादित परिसर में प्रवेश करने में कामयाब रहे। लेकिन अंदर सुरक्षा में तैनात केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बलों के जवानों ने उन युवकों को खदेड़ कर तुरंत बाहर कर दिया।

इसके बाद वहां लोगो ने पुलिस के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। अब भी बड़ी संख्या में दूर-दूर से लोग मस्जिद देखने के लिए आ रहे हैं और वे मेट्रो द्वारा लगाए गए चादरों के छेद या ग्रिलों, आस-पास के घरों पर चढ़कर अंदर की एक झलक देखने का प्रयास कर रहे हैं जिसे रोकने पर पुलिस को पसीने छूट रहे हैं।

मौके पर एक प्रत्यक्षदर्शी नवाबुद्दीन (58)और रफीक उल्ला (22)ने बताया कि शनिवार को जामा मस्जिद की नमाज के बाद तराबी शुरू होते ही यहां पर लगभग 10 से 12 हजार लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई थी। भीड़ सुरक्षा कर्मियों को धकियाते हुए सुभाष मैदान के अंदर घुस गई।

इसके बाद पुलिस बल का प्रयोग करते हुए भीड़ को विवादित परिसर से बाहर निकाल दिया। इसी बीच और काफी संख्या में भीड़ जमा हो गई और पुलिस, एमसीडी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बसों के शीशे तोड़ दिए, बसों में आग लगाने की कोशिश की। पुलिस ने फिर भीड़ बल प्रयोग करते हुए लगभग एक दर्जन आंसू गैस के गोले छोड़कर स्थिति पर काबू किया।

सुभाष मैदान पर सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं हैं इसी कारण कुछ असामाजिक तत्व सील परिसर में घुसकर कानून को तोड़ रहे हैं। सुभाष मैदान सील कर पुलिस के हवाले किए जाने के बाद सारी जिम्मेदारी पुलिस की है। -योगेन्द्र चांदोलिया, स्थायी समिति अध्यक्ष

कुछ असमाजिक तत्व है जो दंगा करवाने के लिए परिसर में घुसने का प्रयास कर रहे हैं। मामला कोर्ट में है और कोर्ट का जो भी आदेश है वह हम सभी को मानना चाहिए। -शोएब इकबाल, विधायक 

1 comment:

  1. रमजान के पवित्र दिनों में यह सब और ज़्यादा दुखद है. वैसे भी यह सब होना नहीं चाहिए क्योंकि यह हमारी कौम्पोजिट संस्कृति के खिलाफ है लेकिन साम्प्रदायिक लोग इसे मानेगे नहीं. क़ानून को ऐसे सभी तत्वों से बिना भेद-भाव के सख्ती से निबटना चाहिए.

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